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ताडोबा में बाघों की सुरक्षा पर उठे सवालों पर प्रशासन का स्पष्टीकरण

मुख्य संपादक-हिमायूं अली, मोबाइल नंबर -8975250567

चंद्रपुर : ताडोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प प्रशासन ने हाल ही में एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि ताडोबा क्षेत्र में बाघों की सुरक्षा को लेकर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं।

दरअसल, 26 मई 2026 को प्रकाशित एक खबर में “ताडोबा आणि परिसरातील वाघांच्या सुरक्षेवर प्रश्नचिन्ह” शीर्षक के तहत कुछ गंभीर सवाल उठाए गए थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वन विभाग ने स्पष्ट किया कि बेंगलुरु के एक वन्यजीव फोटोग्राफर से की गई पूछताछ का संबंध किसी भी प्रकार की बाघ शिकार या बाघों के लापता होने की घटना से नहीं है। यह जांच केवल वन क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश के मामले से जुड़ी हुई है।

प्रशासन के अनुसार, अब तक की जांच में बाघों के शिकार अथवा वन्यजीव फोटोग्राफी के नाम पर किसी गंभीर नियम उल्लंघन का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।

वन विभाग ने जानकारी दी कि ताडोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प के कोर और बफर क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 95 बाघ मौजूद हैं। बाघों की आवाजाही पूरे वन क्षेत्र में लगातार होती रहती है और वे कई बार कॉरिडोर के माध्यम से राज्य की सीमाएं भी पार कर जाते हैं। इसके अलावा बढ़ती उम्र, क्षेत्रीय संघर्ष, चोट तथा बीमारी जैसी वजहों से वन्यजीवों की प्राकृतिक मृत्यु भी होती रहती है।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि ताडोबा क्षेत्र में किसी भी बाघ के शिकार का कोई सबूत नहीं मिला है। साथ ही, अन्य विभागों के अधिकारियों द्वारा किसी विशेष जांच या दौरे की जानकारी भी कार्यालय को आधिकारिक रूप से प्राप्त नहीं हुई है।

वन विभाग का कहना है कि प्रकाशित खबर अफवाहों पर आधारित प्रतीत होती है ? अधिकारियों ने आशंका जताई कि स्थानीय रिसॉर्ट संचालकों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के बीच व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के चलते गलत जानकारी फैलायी गई हो सकती है !

अंत में प्रशासन ने दोहराया कि ताडोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प में वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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